Wednesday, January 12, 2011

DOSTI


लाखो की भीड़ में तुमने था हाथ थमाया,
इस झरने से मन्न को किनारे तक  तुमने पहुचाया,

चाँद से सूरज की दूरी का एहसास कराया,
जहा डूब रही थी मैं वाही नाव लाकर तुमने मुझे बचाया,

जब थामा तुम्हारा हाथ तो अजब सा एहसास मैंने पाया,
प्यार की डोर से तुमने ये रिश्ता निभाया,

शुक्रिया उस खुदा का जिसने तुम्हे बनाया,
क्योंकि क्या है दोस्ती का प्यार यह तुमने मुझे बतलाया,

इन हकलाते कदमो को तुमने सीधा चलना सिखाया,
शुक्रिया ए दोस्त मेरे क्योंकि इस दोस्ती के सफ़र में तूने हमें हमसफ़र बनाया...

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