खुदा ने ऐसा क्यों किया ,
चाह था जिसको
उसी को ही जुदा क्यों किया ,
किया जो मैंने खुद से प्यार
तो ज़माने ने मुझे पत्थर क्यों बना दिया ,
सूरत देखि जो आइने में अपनी
तो आइने ने भी मुझे रुला दिया ,
इतनी असा ख़तम न हुई थी मेरी ज़िन्दगी
मौत ने भी हिला दिया ,
ज़िन्दगी ने तो जलाया ही था
गहरे दर्द ने दफन होने न दिया
अपनी मौत के बाद भी खुदा ने साथ न दिया
ज़िन्दगी का पता नही और कफ़न में आस्क छुपा दिया .......
चाह था जिसको
उसी को ही जुदा क्यों किया ,
किया जो मैंने खुद से प्यार
तो ज़माने ने मुझे पत्थर क्यों बना दिया ,
सूरत देखि जो आइने में अपनी
तो आइने ने भी मुझे रुला दिया ,
इतनी असा ख़तम न हुई थी मेरी ज़िन्दगी
मौत ने भी हिला दिया ,
ज़िन्दगी ने तो जलाया ही था
गहरे दर्द ने दफन होने न दिया
अपनी मौत के बाद भी खुदा ने साथ न दिया
ज़िन्दगी का पता नही और कफ़न में आस्क छुपा दिया .......
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